आज़ादी का अमृत महोत्सव पर कविता | Azadi ka amrit Mahotsav par kavita in hindi

आज़ादी का अमृत महोत्सव पर कविता

 

15 अगस्त है इतिहास में परम गौरवशाली दिवस।
भारतीयों ने कर दिया था अंग्रेज़ो को भागने पर विवश॥

आज़ादी के अमृत महोत्सव का अनूठा उत्सव है।
भारत माता की जय-जयकार सुन रहा कलरव है॥

यह महोत्सव देश के लिए त्याग और बलिदान का ।
यह महोत्सव देशभक्ति की भावना के अनुराग का॥

हम वीरों के बलिदान का करें सदैव स्मरण।
भारतमाता की खातिर लड़ गए आजादी का रण॥

आज देशभक्ति के नारों से गुंजित आसमान हो।
माँ भारती रहे स्वतंत्र ये हर युवा का अरमान हो॥

देश के वीरों को करते हम बारम्बार प्रणाम है।
भारत देश रच रहा उन्नति के नित-नए आयाम है॥

आज़ादी के लिए जन-जन ने किये संघर्ष लगातार थे।
स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए रहे जेल में काले पानी पार थे॥

देश रहेगा उनके त्याग और बलिदान का कर्जदार हमेशा।
आज़ादी के लिए जिन्होने झेले कष्टदायी प्रहार हमेशा ॥

अमृत महोत्सव का ऐतिहासिक दिन आज 15 अगस्त।
भारत के वीरों के आगे अंग्रेजों के हौसले हुए पस्त।।

विश्वविजयी तिरंगे की पताका लहराते जाएँगे।
माँ भारती का नाम विश्व में उज्ज्वल करते जाएँगे॥

एकता और अनुशासन से भारत माता का जयकार करें ॥
विश्व गुरु बने भारत फिर मिलकर कुछ ऐसा सहकार करें ॥

(C) दुलीचंद कालीरमन, कवि एवं लेखक 

 

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